असहमत! समाज जीवित है! हर रोज किसी न किसी कोने में विरोध का आवाज बुलुंद हो रहा है! उनकी रैली तो देखो, जो महीने या फिर दो महीने पर होती है, किसी राज्य या देश स्तर पर भी, लाखों मजदुर और किसान जमा हो जाते है! और यह लोग भाजपा या कोंग्रेस की भीड़ से अलग हैं, पैसे के लिए नहीं आते, बदलाव का हिस्सा बनाने के लिए आते है!
हाँ, दो सवाल हैं? समाज कहाँ ढूंड रहे हो? मध्यम वर्गीय जनता के बीच या फिर बड़े महल में रहने वाले पूंजीपति या उनके खिदमतगार? देखो समाज को मजदुर वर्ग और किसानों के बीच! मुझे मालूम है आप भी उन्हें ही ढूंड रहे हैं!
दूसरा, हमारे ‘समाज’ का नेत्रित्व किसके हाथ में है? दुर्भाग्य की नेत्रित्व ‘वाम’ के हाथ में होने के बावजूद पूंजी के लिए ही काम कर रहा है!
मजदुर वर्ग दुनिया में अबतक सबसे विकसित वर्ग है, क्रांति के लिए सबसे उपयुक्त वर्ग, वैसे कोई दूसरा कर भी नहीं सकता! जरुरत है, उसे जागरूक करने की, शिक्षित करने की, एकताबद्ध करने की! क्रन्तिकारी उफान आने पर सही नेत्रित्व क्रांति को सही मुहीम ओअर पहूँचाने में सफल होगा!
दुनिया में मजदुर एक हो!

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